परिचय (Introduction)
भारतीय इतिहास में 'विजयनगर साम्राज्य' (Vijayanagara Empire) का स्थान अत्यंत गौरवशाली रहा है। मध्यकालीन भारत में हिंदू संस्कृति की रक्षा, कला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में इस साम्राज्य का योगदान अद्वितीय है।
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC आदि) में हरिहर-बुक्का, कृष्णदेवराय, अष्टदिग्गज, तालीकोटा का युद्ध और विजयनगर के प्रशासन (अमरनायक व्यवस्था) से लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं। आपकी बेहतरीन तैयारी के लिए आज हम लेकर आए हैं विजयनगर साम्राज्य पर आधारित 57 महत्वपूर्ण प्रश्नों का महा-सेट। हर प्रश्न के साथ दी गई विस्तृत व्याख्या आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह स्पष्ट कर देगी। आइए शुरू करते हैं:
▶ खंड 1: स्थापना, राजधानी और चार वंश
प्रश्न 1: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कब और किसने की?
(A) 1336 ईस्वी में हरिहर और बुक्का राय ने
(B) 1300 ईस्वी में प्रताप रुद्र ने
(C) 1347 ईस्वी में अलाउद्दीन बहमन शाह ने
(D) 1320 ईस्वी में गियासुद्दीन ने
उत्तर: (A) 1336 ईस्वी में हरिहर और बुक्का राय ने
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में हरिहर (हक्क) और बुक्का राय ने तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर की। ये दोनों भाई काकतीय वंश के अधिकारी थे।
प्रश्न 2: हरिहर और बुक्का राय को विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की प्रेरणा किससे मिली?
(A) अरब व्यापारियों से
(B) विद्यारण्य स्वामी (माधवाचार्य) के आध्यात्मिक मार्गदर्शन से
(C) बहमनी सल्तनत से
(D) चोल राजाओं से
उत्तर: (B) विद्यारण्य स्वामी (माधवाचार्य) के आध्यात्मिक मार्गदर्शन से
व्याख्या: विद्यारण्य स्वामी (माधवाचार्य) — शृंगेरी मठ के जगद्गुरु — ने हरिहर और बुक्का को प्रेरित किया। वे तुगलक बंदी से मुक्त होकर हिंदू धर्म लौटे थे। विद्यारण्य को 'विजयनगर का जनक' कहते हैं।
प्रश्न 3: विजयनगर साम्राज्य की राजधानी कहाँ थी?
(A) मदुरा
(B) मैसूर
(C) हम्पी (Hampi) — तुंगभद्रा नदी के तट पर, कर्नाटक
(D) तंजावुर
उत्तर: (C) हम्पी (Hampi) — तुंगभद्रा नदी के तट पर, कर्नाटक
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य की राजधानी 'विजयनगर' (Vijayanagara) थी जिसके अवशेष आज 'हम्पी' (Hampi, कर्नाटक) में हैं। 1986 से UNESCO विश्व धरोहर स्थल।
प्रश्न 4: विजयनगर साम्राज्य किन चार वंशों में विभाजित था?
(A) चोल, पांड्य, चेर, पल्लव
(B) नायक, पल्लव, चोल, पांड्य
(C) होयसाल, काकतीय, चालुक्य, राष्ट्रकूट
(D) संगम, सालुव, तुळुव, अरविडु
उत्तर: (D) संगम, सालुव, तुळुव, अरविडु
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य में चार राजवंश हुए: (1) संगम वंश (1336–1485), (2) सालुव वंश (1485–1505), (3) तुळुव वंश (1505–1570), (4) अरविडु वंश (1570–1650)।
प्रश्न 5: विजयनगर और बहमनी सल्तनत के बीच संघर्ष का मुख्य कारण क्या था?
(A) रायचूर दोआब (कृष्णा-तुंगभद्रा के बीच की उपजाऊ भूमि) पर नियंत्रण
(B) धर्म
(C) व्यापार मार्ग
(D) राजनीतिक वर्चस्व
उत्तर: (A) रायचूर दोआब (कृष्णा-तुंगभद्रा के बीच की उपजाऊ भूमि) पर नियंत्रण
व्याख्या: विजयनगर और बहमनी के बीच मुख्य विवाद 'रायचूर दोआब' (कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच की उपजाऊ भूमि) पर था। यह क्षेत्र सोने और हीरे की खदानों के लिए भी प्रसिद्ध था।
▶ खंड 2: संगम वंश — देवराय द्वितीय तक
प्रश्न 6: संगम वंश के प्रमुख शासक कौन-कौन थे?
(A) कृष्णदेवराय, अच्युत, सदाशिव
(B) हरिहर प्रथम, बुक्का प्रथम, हरिहर द्वितीय, देवराय प्रथम और द्वितीय
(C) नरसिंह, सालुव, वीर नरसिंह
(D) रामराय, तिरुमल, वेंकट
उत्तर: (B) हरिहर प्रथम, बुक्का प्रथम, हरिहर द्वितीय, देवराय प्रथम और द्वितीय
व्याख्या: संगम वंश के प्रमुख शासक: हरिहर प्रथम (1336–56), बुक्का प्रथम (1356–77), हरिहर द्वितीय (1377–1404), देवराय प्रथम (1406–22) और देवराय द्वितीय (1422–46)।
प्रश्न 7: देवराय द्वितीय (Devaraya II) की क्या विशेषता थी?
(A) केवल मंदिर बनवाए
(B) बहमनी से हार गए
(C) संगम वंश का सबसे महान शासक — सेना में मुस्लिम और विदेशी सैनिक, 'प्रौढ़देवराय' उपाधि
(D) कमजोर शासक
उत्तर: (C) संगम वंश का सबसे महान शासक — सेना में मुस्लिम और विदेशी सैनिक, 'प्रौढ़देवराय' उपाधि
व्याख्या: देवराय द्वितीय (1422–46) संगम वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा था। उपनाम 'प्रौढ़देवराय'। उसने सेना में मुस्लिम धनुर्धरों को भर्ती किया। फारसी दूतावास उसके दरबार में आए।
प्रश्न 8: देवराय द्वितीय ने अपनी सेना में मुस्लिम सैनिक क्यों भर्ती किए?
(A) धर्म परिवर्तन के लिए
(B) खलीफा के आदेश पर
(C) व्यापार के लिए
(D) बहमनी की घुड़सवार और तीरंदाज सेना का मुकाबला करने के लिए
उत्तर: (D) बहमनी की घुड़सवार और तीरंदाज सेना का मुकाबला करने के लिए
व्याख्या: देवराय द्वितीय ने मुस्लिम धनुर्धर (Archers) और घुड़सवार भर्ती किए क्योंकि बहमनी की इस प्रकार की सेना विजयनगर से श्रेष्ठ थी। यह व्यावहारिक सैन्य नीति थी।
प्रश्न 9: इटालियन यात्री निकोलो कोंटी (Nicolo Conti) किसके काल में विजयनगर आया?
(A) देवराय द्वितीय के काल में (1420 ईस्वी)
(B) कृष्णदेवराय के काल में
(C) हरिहर प्रथम के काल में
(D) अच्युत के काल में
उत्तर: (A) देवराय द्वितीय के काल में (1420 ईस्वी)
व्याख्या: इटालियन यात्री निकोलो कोंटी लगभग 1420 ईस्वी में देवराय द्वितीय के काल में विजयनगर आया। उसने विजयनगर की समृद्धि और भव्यता का वर्णन किया।
▶ खंड 3: सालुव और तुळुव वंश
प्रश्न 10: सालुव वंश की स्थापना किसने की?
(A) कृष्णदेवराय ने
(B) सालुव नरसिंह ने — 1485 में संगम वंश को हटाकर
(C) नरसा नायक ने
(D) वीर नरसिंह ने
उत्तर: (B) सालुव नरसिंह ने — 1485 में संगम वंश को हटाकर
व्याख्या: सालुव नरसिंह (Saluva Narasimha) ने 1485 ईस्वी में संगम वंश के अंतिम राजा को हटाकर सालुव वंश की स्थापना की। यह वंश अल्पकालिक (1485–1505) रहा।
प्रश्न 11: तुळुव वंश की स्थापना किसने की?
(A) कृष्णदेवराय ने
(B) सालुव नरसिंह ने
(C) वीर नरसिंह (Vira Narasimha) ने — 1505 में
(D) नरसा नायक ने
उत्तर: (C) वीर नरसिंह (Vira Narasimha) ने — 1505 में
व्याख्या: वीर नरसिंह ने 1505 ईस्वी में तुळुव वंश की स्थापना की। तुळुव वंश का सर्वश्रेष्ठ शासक कृष्णदेवराय (1509–29) था।
▶ खंड 4: कृष्णदेवराय — विजय, साहित्य, तेनालीराम
प्रश्न 12: कृष्णदेवराय का शासनकाल कब था?
(A) 1400–1430 ईस्वी
(B) 1550–1570 ईस्वी
(C) 1336–1356 ईस्वी
(D) 1509–1529 ईस्वी
उत्तर: (D) 1509–1529 ईस्वी
व्याख्या: कृष्णदेवराय (Krishnadevaraya) का शासनकाल 1509–1529 ईस्वी था। वह विजयनगर साम्राज्य का सर्वश्रेष्ठ और सबसे महान शासक था।
प्रश्न 13: कृष्णदेवराय को 'आंध्र भोज' क्यों कहते हैं?
(A) साहित्य-प्रेमी, तेलुगु और संस्कृत के महान संरक्षक — 'अष्टदिग्गज' के आश्रयदाता
(B) आंध्र के राजा थे
(C) वे कवि नहीं थे
(D) भोजपुर से संबंधित
उत्तर: (A) साहित्य-प्रेमी, तेलुगु और संस्कृत के महान संरक्षक — 'अष्टदिग्गज' के आश्रयदाता
व्याख्या: कृष्णदेवराय को 'आंध्र भोज' (तेलुगु साहित्य के महान संरक्षक) कहते हैं। उनके दरबार में 'अष्टदिग्गज' (आठ महान कवि) थे। वे स्वयं 'आमुक्तमाल्यद' (तेलुगु) और 'जाम्बवती कल्याणम' (संस्कृत) के रचयिता थे।
प्रश्न 14: कृष्णदेवराय के दरबार के 'अष्टदिग्गज' में सबसे प्रसिद्ध कवि कौन था?
(A) विद्यारण्य स्वामी
(B) अल्लसानि पेद्दन (Allasani Peddana) — 'आंध्र कवि-पितामह', 'मनुचरित्र' के रचयिता
(C) तेनालीराम
(D) माधवाचार्य
उत्तर: (B) अल्लसानि पेद्दन (Allasani Peddana) — 'आंध्र कवि-पितामह', 'मनुचरित्र' के रचयिता
व्याख्या: अष्टदिग्गज में 'अल्लसानि पेद्दन' सबसे प्रतिष्ठित थे — 'आंध्र कवि-पितामह' (Grandfather of Telugu Poetry)। उनकी 'मनुचरित्र' (Manucharitra) तेलुगु साहित्य की श्रेष्ठ रचना है।
प्रश्न 15: कृष्णदेवराय की 'आमुक्तमाल्यद' किस विषय पर है?
(A) युद्ध का वर्णन
(B) इतिहास
(C) विष्णुचित्त (पेरियाळ्वार) और गोदादेवी की भक्ति कथा — वैष्णव भक्ति महाकाव्य (तेलुगु)
(D) दर्शन
उत्तर: (C) विष्णुचित्त (पेरियाळ्वार) और गोदादेवी की भक्ति कथा — वैष्णव भक्ति महाकाव्य (तेलुगु)
व्याख्या: 'आमुक्तमाल्यद' (Amuktamalyada — 'वह जो मालाएँ पहनाती है') कृष्णदेवराय द्वारा तेलुगु में रचित वैष्णव भक्ति महाकाव्य है। यह तेलुगु साहित्य की पाँच श्रेष्ठ रचनाओं में मानी जाती है।
प्रश्न 16: कृष्णदेवराय के काल में तेनालीराम (Tenali Ramakrishna) कौन थे?
(A) सेनापति
(B) पुजारी
(C) मंत्री
(D) दरबारी विदूषक-कवि — 'विकट कवि' — अपनी बुद्धि और व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध
उत्तर: (D) दरबारी विदूषक-कवि — 'विकट कवि' — अपनी बुद्धि और व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध
व्याख्या: तेनालीराम (तेनालिरामकृष्ण) कृष्णदेवराय के दरबारी कवि और विदूषक थे। 'विकट कवि' उनकी उपाधि थी। उनकी बुद्धि की कहानियाँ आज भी प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 17: कृष्णदेवराय ने ओड़िशा (गजपति राज्य) पर कब और क्यों आक्रमण किया?
(A) 1513–14 में — उड़िया राजा प्रताप रुद्र गजपति को हराया और कृष्णा से उत्तर का क्षेत्र जीता
(B) 1500 में व्यापार के लिए
(C) 1520 में मंदिर के लिए
(D) 1505 में भूमि के लिए
उत्तर: (A) 1513–14 में — उड़िया राजा प्रताप रुद्र गजपति को हराया और कृष्णा से उत्तर का क्षेत्र जीता
व्याख्या: 1513–14 ईस्वी में कृष्णदेवराय ने गजपति राज्य (उड़ीसा) के राजा प्रताप रुद्र गजपति को पराजित किया। कृष्णा नदी के उत्तर के क्षेत्र जीते। बाद में संधि — अपनी पुत्री का विवाह गजपति से।
प्रश्न 18: कृष्णदेवराय ने बहमनी के उत्तराधिकारी राज्यों के साथ कैसा व्यवहार किया?
(A) सभी से शत्रुता
(B) रायचूर (1520) जीता — बीदर, बीजापुर, गोलकुंडा से कभी मित्रता कभी युद्ध, 'कन्नड़ राज्य रमारमण' उपाधि
(C) सभी को जीता
(D) सभी से संधि
उत्तर: (B) रायचूर (1520) जीता — बीदर, बीजापुर, गोलकुंडा से कभी मित्रता कभी युद्ध, 'कन्नड़ राज्य रमारमण' उपाधि
व्याख्या: 1520 में कृष्णदेवराय ने बीजापुर के आदिलशाह से रायचूर दोआब जीता। उन्होंने 'कन्नड़ राज्य रमारमण' (कन्नड़ राज्य के सुख देने वाले) उपाधि ली। वे कभी मित्र कभी शत्रु रहे।
प्रश्न 19: पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस (Domingo Paes) ने कृष्णदेवराय के बारे में क्या लिखा?
(A) कमजोर राजा था
(B) धार्मिक कट्टर थे
(C) वे विश्व के सबसे महान राजाओं में से एक, अत्यंत न्यायप्रिय और साहसी — विजयनगर की भव्यता का वर्णन
(D) गरीब राज्य था
उत्तर: (C) वे विश्व के सबसे महान राजाओं में से एक, अत्यंत न्यायप्रिय और साहसी — विजयनगर की भव्यता का वर्णन
व्याख्या: पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस (1520–22) ने लिखा: 'कृष्णदेवराय विश्व के सर्वश्रेष्ठ राजाओं में से हैं — न्यायप्रिय, साहसी और उदार।' विजयनगर नगर की तुलना उसने रोम से की।
प्रश्न 20: फर्नाओ नुनेज (Fernao Nuniz) किसके काल में विजयनगर आया?
(A) कृष्णदेवराय के काल में
(B) रामराय के काल में
(C) हरिहर के काल में
(D) अच्युत राय के काल में (1535–37)
उत्तर: (D) अच्युत राय के काल में (1535–37)
व्याख्या: फर्नाओ नुनेज (Fernao Nuniz) 1535–37 ईस्वी में अच्युत राय (Achyuta Raya) के काल में विजयनगर आया। उसने साम्राज्य के प्रशासन, सेना और व्यापार का विस्तृत विवरण दिया।
▶ खंड 5: तालीकोटा युद्ध (1565) और पतन
प्रश्न 21: तालीकोटा का युद्ध (Battle of Talikota) कब हुआ?
(A) 23 जनवरी 1565 ईस्वी
(B) 1526 ईस्वी
(C) 1498 ईस्वी
(D) 1600 ईस्वी
उत्तर: (A) 23 जनवरी 1565 ईस्वी
व्याख्या: तालीकोटा का युद्ध (Talikota/Rakshasi-Tangadi) 23 जनवरी 1565 ईस्वी को हुआ। यह विजयनगर साम्राज्य के इतिहास का सबसे निर्णायक और विनाशकारी युद्ध था।
प्रश्न 22: तालीकोटा युद्ध में विजयनगर की ओर से कौन लड़ा और क्या हुआ?
(A) कृष्णदेवराय ने
(B) रामराय (Ramaraya/Aliya Ramaraya) — सदाशिव राय का संरक्षक — मारा गया
(C) अच्युत राय ने
(D) तिरुमल ने
उत्तर: (B) रामराय (Ramaraya/Aliya Ramaraya) — सदाशिव राय का संरक्षक — मारा गया
व्याख्या: तालीकोटा में विजयनगर की ओर से 'रामराय' (अलिया रामराय — सदाशिव राय का संरक्षक मंत्री) लड़ा। युद्ध में रामराय पकड़ा गया और बीजापुर के आदिलशाह ने उसकी हत्या की।
प्रश्न 23: तालीकोटा युद्ध में विजयनगर के विरुद्ध कौन से सल्तनतें थीं?
(A) केवल बीजापुर
(B) केवल गोलकुंडा
(C) बीजापुर, बीदर, अहमदनगर और गोलकुंडा — चार दक्कनी सल्तनतों का गठबंधन
(D) केवल बहमनी
उत्तर: (C) बीजापुर, बीदर, अहमदनगर और गोलकुंडा — चार दक्कनी सल्तनतों का गठबंधन
व्याख्या: तालीकोटा में चार दक्कनी सल्तनतों — बीजापुर, बीदर, अहमदनगर और गोलकुंडा — ने गठबंधन (Deccan Confederacy) बनाया। यह रामराय की आक्रामक नीति की प्रतिक्रिया थी।
प्रश्न 24: तालीकोटा युद्ध के बाद विजयनगर का क्या हुआ?
(A) पुनः शक्तिशाली बना
(B) नया वंश बना
(C) संधि हुई
(D) विजयनगर नगर लूटा और जलाया गया — साम्राज्य टूट गया, राजधानी पेनुकोंडा स्थानांतरित
उत्तर: (D) विजयनगर नगर लूटा और जलाया गया — साम्राज्य टूट गया, राजधानी पेनुकोंडा स्थानांतरित
व्याख्या: तालीकोटा के बाद दक्कनी सल्तनतों ने विजयनगर नगर को लूटा और 6 महीने तक जलाया। साम्राज्य टूट गया। अरविडु वंश ने पेनुकोंडा और बाद में चंद्रगिरि से शासन किया।
प्रश्न 25: तालीकोटा में विजयनगर की हार के मुख्य कारण क्या थे?
(A) रामराय का अहंकार, मुस्लिम सैनिकों का पक्ष बदलना, दक्कनी एकता और तोप-तकनीक
(B) केवल संख्या में कम
(C) केवल धार्मिक
(D) केवल आर्थिक
उत्तर: (A) रामराय का अहंकार, मुस्लिम सैनिकों का पक्ष बदलना, दक्कनी एकता और तोप-तकनीक
व्याख्या: हार के कारण: (1) रामराय का दंभ और दक्कनी सल्तनतों का एकजुट होना, (2) विजयनगर सेना में शामिल मुस्लिम सेनापतियों का पाला बदलना, (3) दक्कनी सल्तनतों की बेहतर तोप-तकनीक।
प्रश्न 26: अरविडु वंश (1570–1650) के बारे में क्या जानते हैं?
(A) अत्यंत शक्तिशाली थे
(B) विजयनगर का अंतिम वंश — तालीकोटा के बाद कमजोर, पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से शासन
(C) उत्तर भारत पर राज्य किया
(D) मुगलों के मित्र थे
उत्तर: (B) विजयनगर का अंतिम वंश — तालीकोटा के बाद कमजोर, पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से शासन
व्याख्या: अरविडु वंश (1570–1650) तालीकोटा के बाद पेनुकोंडा, फिर चंद्रगिरि से शासन करता रहा। वेंकट द्वितीय (1586–1614) सबसे शक्तिशाली अरविडु शासक था। अंततः 17वीं शताब्दी में साम्राज्य समाप्त हो गया।
▶ खंड 6: प्रशासन — नायंकार, अमरनायक, आयगार
प्रश्न 27: विजयनगर की केंद्रीय प्रशासनिक इकाइयाँ क्या थीं?
(A) देश-जिला-ग्राम
(B) सूबा-सरकार-परगना
(C) राजधानी → मंडलम/प्रांत → नाडु (जिला) → मेलग्राम → ग्राम
(D) जनपद-विषय-ग्राम
उत्तर: (C) राजधानी → मंडलम/प्रांत → नाडु (जिला) → मेलग्राम → ग्राम
व्याख्या: विजयनगर प्रशासन की इकाइयाँ: राजधानी → राज्य (मंडलम/प्रांत) → नाडु (जिला) → मेलग्राम (उप-जिला) → ग्राम (Village)।
प्रश्न 28: विजयनगर में 'नायंकार' (Nayankara) व्यवस्था क्या थी?
(A) एक धार्मिक पद
(B) व्यापार संगठन
(C) एक कर
(D) सैन्य-सामंत प्रणाली — नायक को 'अमरम' (सेवा के बदले भूमि) दी जाती थी
उत्तर: (D) सैन्य-सामंत प्रणाली — नायक को 'अमरम' (सेवा के बदले भूमि) दी जाती थी
व्याख्या: 'नायंकार' प्रणाली में राजा सैन्य सेवा के बदले 'अमरम' (Amaram — आय का हिस्सा) नायकों को देता था। नायक सेना रखते थे। यह सामंती व्यवस्था थी।
प्रश्न 29: 'अमरनायक' (Amar Nayaka) प्रणाली की क्या विशेषता थी?
(A) नायक को एक क्षेत्र की आय का अधिकार — बदले में सेना और सेवा — विकेंद्रीकरण
(B) केवल धार्मिक
(C) केवल कर व्यवस्था
(D) केवल व्यापार
उत्तर: (A) नायक को एक क्षेत्र की आय का अधिकार — बदले में सेना और सेवा — विकेंद्रीकरण
व्याख्या: अमरनायक को एक क्षेत्र की राजस्व वसूली का अधिकार था। बदले में वह सेना बनाए रखता और राजा की सेवा करता। यह विजयनगर की प्रमुख प्रशासनिक विशेषता थी जो बाद में मराठा 'देशमुख' और 'देशपांडे' प्रणाली का आधार बनी।
प्रश्न 30: विजयनगर में 'आयगार' (Ayagar) व्यवस्था क्या थी?
(A) राजकीय अधिकारी
(B) ग्राम स्तर पर 12 वंशानुगत कार्यकर्ता (लेखाकार, कारीगर, पुजारी) — निःशुल्क सेवा के बदले भूमि
(C) व्यापारी समूह
(D) सैनिक
उत्तर: (B) ग्राम स्तर पर 12 वंशानुगत कार्यकर्ता (लेखाकार, कारीगर, पुजारी) — निःशुल्क सेवा के बदले भूमि
व्याख्या: 'आयगार' व्यवस्था में प्रत्येक गाँव में 12 वंशानुगत सेवक (नायर, तलियारी, मढ़स्थ, कर्णम आदि) होते थे जो निःशुल्क सेवाएँ देते थे। बदले में उन्हें भूमि या अनाज मिलता था।
प्रश्न 31: विजयनगर में 'महानायकाचार्य' (Mahanayakacharya) का क्या कार्य था?
(A) धार्मिक प्रमुख
(B) सेनापति
(C) प्रांतीय गवर्नर — मंडलम का प्रशासक
(D) व्यापार प्रमुख
उत्तर: (C) प्रांतीय गवर्नर — मंडलम का प्रशासक
व्याख्या: 'महानायकाचार्य' विजयनगर में प्रांतीय गवर्नर था जो 'मंडलम' (प्रांत) का प्रशासन देखता था। वह सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी था।
प्रश्न 32: विजयनगर में 'न्याय व्यवस्था' कैसी थी?
(A) केवल राजा न्याय देता था
(B) काजी न्याय देते थे
(C) कोई न्याय नहीं
(D) ग्राम स्तर पर पंचायत, उच्च स्तर पर धर्मासन (Dharmasana) — राजा सर्वोच्च न्यायाधीश
उत्तर: (D) ग्राम स्तर पर पंचायत, उच्च स्तर पर धर्मासन (Dharmasana) — राजा सर्वोच्च न्यायाधीश
व्याख्या: विजयनगर में न्याय व्यवस्था: ग्राम-पंचायत, 'धर्मासन' (Dharmasana — उच्च न्यायालय), और राजा सर्वोच्च न्यायाधीश। हिंदू धर्मशास्त्र न्याय का आधार था।
▶ खंड 7: अर्थव्यवस्था और व्यापार
प्रश्न 33: विजयनगर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या था?
(A) कृषि, व्यापार (पुर्तगाल-अरब-चीन), कपड़ा उद्योग और हीरे-घोड़े का व्यापार
(B) केवल कृषि
(C) केवल व्यापार
(D) खनन
उत्तर: (A) कृषि, व्यापार (पुर्तगाल-अरब-चीन), कपड़ा उद्योग और हीरे-घोड़े का व्यापार
व्याख्या: विजयनगर की अर्थव्यवस्था: (1) कृषि (चावल, गन्ना, कपास), (2) विदेशी व्यापार (पुर्तगाल, अरब, चीन), (3) कपड़ा और वस्त्र उद्योग, (4) हीरे-रत्न खनन (गोलकुंडा क्षेत्र), (5) घोड़े का आयात।
प्रश्न 34: विजयनगर और पुर्तगाल के बीच व्यापार का क्या स्वरूप था?
(A) केवल मसाले
(B) पुर्तगाल से घोड़े आयात — विजयनगर से मसाले, कपड़ा, रत्न निर्यात — गोवा प्रमुख बंदरगाह
(C) कोई व्यापार नहीं
(D) केवल सोने का व्यापार
उत्तर: (B) पुर्तगाल से घोड़े आयात — विजयनगर से मसाले, कपड़ा, रत्न निर्यात — गोवा प्रमुख बंदरगाह
व्याख्या: विजयनगर-पुर्तगाल व्यापार: पुर्तगाल से घोड़े (अरब घोड़ों का आयात — सेना के लिए अनिवार्य)। विजयनगर से मसाले, कपड़ा, रत्न। गोवा बंदरगाह इस व्यापार का केंद्र था।
प्रश्न 35: विजयनगर में घोड़ों का आयात क्यों महत्त्वपूर्ण था?
(A) केवल प्रतिष्ठा
(B) व्यापार के लिए
(C) घोड़े दक्षिण भारत में नहीं पलते थे — अरब और पर्शियन घोड़े सेना की जरूरत थे
(D) धार्मिक उपयोग
उत्तर: (C) घोड़े दक्षिण भारत में नहीं पलते थे — अरब और पर्शियन घोड़े सेना की जरूरत थे
व्याख्या: दक्षिण भारत की जलवायु में अरबी घोड़े नहीं पलते थे। हर साल 10,000–15,000 घोड़े अरब और पर्शिया से खरीदने पड़ते थे। विजयनगर के राजस्व का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च होता था।
प्रश्न 36: विजयनगर का प्रमुख बंदरगाह कौन सा था?
(A) मंगलौर
(B) विजयवाड़ा
(C) मछलीपट्टनम
(D) कालीकट (Calicut/Kozhikode)
उत्तर: (D) कालीकट (Calicut/Kozhikode)
व्याख्या: विजयनगर का प्रमुख बंदरगाह 'कालीकट' (Calicut/Kozhikode) था। यहाँ से अरब, पुर्तगाल और चीन के साथ व्यापार होता था। काली मिर्च, दालचीनी और मसालों का निर्यात।
प्रश्न 37: विजयनगर में 'श्रेणियों' (Guilds) की क्या भूमिका थी?
(A) बाजार संगठन, व्यापार नियंत्रण और कारीगर संगठन — 'बलिजा' श्रेणी सबसे शक्तिशाली
(B) कोई भूमिका नहीं
(C) केवल धार्मिक
(D) केवल कर वसूली
उत्तर: (A) बाजार संगठन, व्यापार नियंत्रण और कारीगर संगठन — 'बलिजा' श्रेणी सबसे शक्तिशाली
व्याख्या: विजयनगर में 'बलिजा' (Balija) श्रेणी सबसे शक्तिशाली व्यापारी समुदाय था। वे दूर-दराज के व्यापार में सक्रिय थे। 'नानादेशी' (विभिन्न देशों के) व्यापारी भी सक्रिय थे।
प्रश्न 38: विजयनगर के राजस्व के प्रमुख स्रोत क्या थे?
(A) केवल भूमि कर
(B) भूमि कर, व्यापार कर, बाजार शुल्क, गृह कर, मंदिर कर और विवाह कर
(C) केवल व्यापार कर
(D) केवल सैन्य लूट
उत्तर: (B) भूमि कर, व्यापार कर, बाजार शुल्क, गृह कर, मंदिर कर और विवाह कर
व्याख्या: विजयनगर के राजस्व स्रोत: (1) भूमि कर (1/6 से 1/3 उपज), (2) व्यापार और बाजार शुल्क, (3) गृह कर, (4) विवाह कर (Vivaha Sungam), (5) पेशेवर कर।
▶ खंड 8: धर्म और समाज
प्रश्न 39: विजयनगर के राजा किस धर्म के अनुयायी थे?
(A) केवल शैव
(B) केवल जैन
(C) मुख्यतः वैष्णव (Vaishnava) — 'परम वैष्णव' उपाधि, पर शैव और जैन को भी संरक्षण
(D) बौद्ध
उत्तर: (C) मुख्यतः वैष्णव (Vaishnava) — 'परम वैष्णव' उपाधि, पर शैव और जैन को भी संरक्षण
व्याख्या: विजयनगर के अधिकांश राजा वैष्णव थे और 'परम वैष्णव' उपाधि धारण करते थे। पर उन्होंने शैव, शाक्त और जैन — सभी को संरक्षण दिया। धार्मिक सहिष्णुता उनकी नीति थी।
प्रश्न 40: विजयनगर में 'माधवाचार्य' (Madhavacharya/Vidyaranya) का क्या योगदान था?
(A) सेनापति
(B) व्यापारी
(C) मंत्री
(D) विजयनगर के जगद्गुरु — अद्वैत वेदांत का प्रचार, 'सर्वदर्शनसंग्रह' के रचयिता, हरिहर-बुक्का के प्रेरणास्रोत
उत्तर: (D) विजयनगर के जगद्गुरु — अद्वैत वेदांत का प्रचार, 'सर्वदर्शनसंग्रह' के रचयिता, हरिहर-बुक्का के प्रेरणास्रोत
व्याख्या: विद्यारण्य (माधवाचार्य) विजयनगर के आध्यात्मिक प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने 'सर्वदर्शनसंग्रह' (16 दर्शनों का संग्रह) लिखा। शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत का प्रचार किया।
प्रश्न 41: विजयनगर में 'वैष्णव मंदिर' और 'मठ' का क्या महत्त्व था?
(A) धर्म, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक केंद्र — विशाल भूमि और संपत्ति के स्वामी
(B) केवल धार्मिक
(C) केवल पूजा
(D) केवल संगीत
उत्तर: (A) धर्म, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक केंद्र — विशाल भूमि और संपत्ति के स्वामी
व्याख्या: विजयनगर मंदिर धर्म, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के केंद्र थे। उनके पास विशाल भूमि (देवदान), पशु और नौकर होते थे। तिरुपति जैसे मंदिर अत्यंत समृद्ध थे।
प्रश्न 42: विजयनगर में महिलाओं की क्या स्थिति थी?
(A) बहुत खराब
(B) अपेक्षाकृत अच्छी — देवदासियाँ, महिला पहलवान, महिला दरबारी, नायकियाँ (महिला सेनापति)
(C) कोई अधिकार नहीं
(D) पर्दा प्रथा थी
उत्तर: (B) अपेक्षाकृत अच्छी — देवदासियाँ, महिला पहलवान, महिला दरबारी, नायकियाँ (महिला सेनापति)
व्याख्या: डोमिंगो पायस के अनुसार विजयनगर में देवदासियाँ, महिला पहलवान, महिला दरबारी और महिला सेनापति ('नायकियाँ') थीं। राजा के महल में महिला अंगरक्षक भी थीं।
प्रश्न 43: विजयनगर में 'जाति व्यवस्था' की क्या स्थिति थी?
(A) समाप्त हो गई
(B) लचीली थी
(C) कठोर जाति व्यवस्था — परंतु व्यापारी और शिल्पकार जातियों को महत्त्व मिला
(D) कोई जाति नहीं थी
उत्तर: (C) कठोर जाति व्यवस्था — परंतु व्यापारी और शिल्पकार जातियों को महत्त्व मिला
व्याख्या: विजयनगर में जाति व्यवस्था कठोर थी, लेकिन व्यापार और उद्योग के विस्तार के कारण बुनकरों, व्यापारियों (जैसे 'बलिजा') और शिल्पकारों का सामाजिक स्तर बढ़ गया था।
▶ खंड 9: कला और वास्तुकला
प्रश्न 44: विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला शैली को क्या कहा जाता है?
(A) नागर शैली
(B) वेसर शैली
(C) इंडो-इस्लामिक शैली
(D) प्रोविंशियल (प्रांतीय) द्रविड़ शैली (विजयनगर शैली)
उत्तर: (D) प्रोविंशियल (प्रांतीय) द्रविड़ शैली (विजयनगर शैली)
व्याख्या: विजयनगर वास्तुकला द्रविड़ शैली का ही एक उन्नत और अलंकृत रूप है। इसे 'विजयनगर शैली' भी कहते हैं, जिसकी विशेषताएँ इसके ऊंचे गोपुरम और नक्काशीदार खंभे हैं।
प्रश्न 45: विजयनगर वास्तुकला की सबसे प्रमुख विशेषता क्या थी?
(A) गुंबद और मेहराब
(B) ईंटों का अत्यधिक प्रयोग
(C) कल्याण मंडप (Kalyana Mandapa), ऊंचे और अलंकृत 'गोपुरम', नक्काशीदार खंभे (विशेषकर घोड़ों की आकृतियां)
(D) सादे और बिना सजावट वाले मंदिर
उत्तर: (C) कल्याण मंडप (Kalyana Mandapa), ऊंचे और अलंकृत 'गोपुरम', नक्काशीदार खंभे (विशेषकर घोड़ों की आकृतियां)
व्याख्या: विजयनगर शैली के मंदिरों में 'कल्याण मंडप' (जहाँ देवताओं का विवाह समारोह होता था), प्रवेश द्वारों पर अत्यंत ऊंचे और भव्य 'राय गोपुरम', और खंभों पर खड़ी मुद्रा में घोड़ों (Yali) की मूर्तियां सबसे प्रमुख विशेषताएं थीं।
प्रश्न 46: हम्पी का प्रसिद्ध 'विरूपाक्ष मंदिर' (Virupaksha Temple) किस देवता को समर्पित है?
(A) भगवान विष्णु
(B) भगवान शिव (पम्पावती के पति)
(C) भगवान कृष्ण
(D) भगवान राम
उत्तर: (B) भगवान शिव (पम्पावती के पति)
व्याख्या: विरूपाक्ष मंदिर भगवान शिव (विरूपाक्ष) को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय देवी 'पम्पा' का पति माना जाता है। यह हम्पी का सबसे पुराना और प्रमुख मंदिर है। विजयनगर के शासक स्वयं को 'विरूपाक्ष के प्रतिनिधि' के रूप में शासन करते थे।
प्रश्न 47: कृष्णदेवराय द्वारा निर्मित हम्पी के 'विट्ठल स्वामी मंदिर' (Vitthala Temple) की सबसे प्रसिद्ध विशेषता क्या है?
(A) इसकी भूमिगत संरचना
(B) इसके सोने के कलश
(C) पत्थर का बना हुआ अलंकृत रथ (Stone Chariot) और संगीतमय खंभे (Musical Pillars)
(D) इसका इंडो-इस्लामिक गुंबद
उत्तर: (C) पत्थर का बना हुआ अलंकृत रथ (Stone Chariot) और संगीतमय खंभे (Musical Pillars)
व्याख्या: विट्ठल मंदिर विजयनगर वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें 56 संगीतमय खंभे (जिन्हें थपथपाने पर सा रे गा मा की ध्वनि निकलती है) और एक अत्यंत सुंदर 'पत्थर का रथ' मौजूद है।
प्रश्न 48: हम्पी में स्थित प्रसिद्ध 'हजारा राम मंदिर' (Hazara Rama Temple) किसने बनवाया था?
(A) हरिहर प्रथम
(B) कृष्णदेवराय (तुळुव वंश)
(C) देवराय द्वितीय
(D) सालुव नरसिंह
उत्तर: (B) कृष्णदेवराय (तुळुव वंश)
व्याख्या: हजारा राम मंदिर का निर्माण कृष्णदेवराय ने करवाया था। यह मंदिर शाही परिवार का निजी मंदिर था, जिसकी दीवारों पर रामायण की कथाओं को उकेरा गया है।
प्रश्न 49: विजयनगर काल की धर्मनिरपेक्ष वास्तुकला (Secular Architecture) का बेहतरीन उदाहरण कौन सा है, जिसमें इंडो-इस्लामिक प्रभाव दिखाई देता है?
(A) विरूपाक्ष मंदिर
(B) लोटस महल (Lotus Mahal) और एलीफेंट स्टेबल (Elephant Stables)
(C) राय गोपुरम
(D) पत्थर का रथ
उत्तर: (B) लोटस महल (Lotus Mahal) और एलीफेंट स्टेबल (Elephant Stables)
व्याख्या: लोटस महल और हाथियों के अस्तबल (Elephant Stables) में हिंदू और इस्लामिक वास्तुकला (मेहराब और गुंबद) का सुंदर मिश्रण (Indo-Islamic Style) देखने को मिलता है।
प्रश्न 50: विजयनगर साम्राज्य का राजकीय प्रतीक (Emblem) क्या था?
(A) गरुड़
(B) नंदी
(C) वराह (Boar)
(D) सिंह
उत्तर: (C) वराह (Boar)
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य का राजकीय प्रतीक 'वराह' (भगवान विष्णु का अवतार) था। उनके सोने के सिक्कों पर भी वराह की आकृति छपी होती थी।
प्रश्न 51: विजयनगर साम्राज्य में सोने के सिक्कों को क्या कहा जाता था?
(A) दीनार
(B) जीतल
(C) टंका
(D) वराह (या पगोडा)
उत्तर: (D) वराह (या पगोडा)
व्याख्या: विजयनगर में चलने वाले सोने के मुख्य सिक्के को 'वराह' कहा जाता था। विदेशी यात्री इसे 'पगोडा' या 'हूण' कहते थे। चांदी के सिक्कों को 'तार' कहा जाता था।
▶ खंड 10: साहित्य — तेलुगु, कन्नड़, पुरंदरदास
प्रश्न 52: विजयनगर काल के साहित्य की प्रमुख भाषाएं कौन सी थीं?
(A) केवल संस्कृत
(B) केवल तमिल
(C) संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल
(D) फारसी और अरबी
उत्तर: (C) संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल
व्याख्या: विजयनगर के शासकों ने साहित्य को भारी संरक्षण दिया। उनके काल में संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल — चारों भाषाओं में महान साहित्य की रचना हुई।
प्रश्न 53: विजयनगर काल के महान विद्वान 'सायण' (Sayana) किस लिए प्रसिद्ध हैं?
(A) गणितज्ञ होने के लिए
(B) चारों वेदों पर अपना भाष्य (Commentary) लिखने के लिए
(C) एक चित्रकार के रूप में
(D) विजयनगर के सेनापति के रूप में
उत्तर: (B) चारों वेदों पर अपना भाष्य (Commentary) लिखने के लिए
व्याख्या: सायण (विद्यारण्य के भाई) हरिहर और बुक्का के मंत्री थे। वे एक प्रकांड वैदिक विद्वान थे, जिन्होंने चारों वेदों पर अपनी सुप्रसिद्ध टीका (भाष्य) लिखी थी।
प्रश्न 54: कृष्णदेवराय की संस्कृत रचना 'जाम्बवती कल्याणम' (Jambavati Kalyanam) किस विषय पर आधारित एक नाटक है?
(A) शिव-पार्वती विवाह
(B) भगवान कृष्ण और जाम्बवती के विवाह की कथा
(C) राम-सीता विवाह
(D) विजयनगर का इतिहास
उत्तर: (B) भगवान कृष्ण और जाम्बवती के विवाह की कथा
व्याख्या: 'जाम्बवती कल्याणम' कृष्णदेवराय द्वारा संस्कृत में लिखा गया एक प्रसिद्ध नाटक है, जो भगवान कृष्ण और भालूराज जाम्बवान की पुत्री जाम्बवती के विवाह का वर्णन करता है।
प्रश्न 55: 'मदुरा विजयम' (Madura Vijayam) नामक ऐतिहासिक संस्कृत काव्य की रचना किसने की थी?
(A) गंगादेवी
(B) तिम्माम्बा
(C) रामभद्राम्बा
(D) कृष्णदेवराय
उत्तर: (A) गंगादेवी
व्याख्या: विजयनगर के राजकुमार कंपन (बुक्का प्रथम के पुत्र) की पत्नी गंगादेवी ने 'मदुरा विजयम' की रचना की थी। इसमें उनके पति द्वारा मदुरै सल्तनत पर की गई विजय का सजीव वर्णन है।
प्रश्न 56: 'पंडुरंग महात्म्य' (Panduranga Mahatmyam) नामक प्रसिद्ध तेलुगु काव्य की रचना किस अष्टदिग्गज कवि ने की थी?
(A) अल्लसानि पेद्दन
(B) नंदी तिम्मन
(C) तेनाली रामकृष्णा
(D) धूर्जटी
उत्तर: (C) तेनाली रामकृष्णा
व्याख्या: तेनाली रामकृष्णा (जिन्हें तेनालीराम भी कहा जाता है) ने 'पंडुरंग महात्म्य' की रचना की थी, जो तेलुगु साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों (Pancha Kavyas) में गिनी जाती है।
▶ खंड 11 & 12: विदेशी यात्री, महत्त्व और पतन
प्रश्न 57: विजयनगर साम्राज्य का पतन अंततः किस शताब्दी में हुआ?
(A) 15वीं शताब्दी
(B) 16वीं शताब्दी (तालीकोटा के तुरंत बाद)
(C) 17वीं शताब्दी (1646-1650 ई. के आसपास)
(D) 18वीं शताब्दी
उत्तर: (C) 17वीं शताब्दी (1646-1650 ई. के आसपास)
व्याख्या: 1565 के तालीकोटा युद्ध ने विजयनगर की कमर तोड़ दी थी, लेकिन अरविडु वंश ने पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से 17वीं शताब्दी के मध्य तक (लगभग 1646-1650) एक छोटे राज्य के रूप में शासन किया, जिसके बाद यह साम्राज्य हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
निष्कर्ष (Conclusion)
विजयनगर साम्राज्य का इतिहास न केवल गौरवमयी रहा है, बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सर्वाधिक अंक दिलाने वाले टॉपिक्स में से एक है। हरिहर-बुक्का की स्थापना से लेकर तालीकोटा के पतन तक, ये 57 प्रश्न आपके पूरे पाठ्यक्रम को कवर करते हैं।
इन प्रश्नों का बार-बार अभ्यास करें और नीचे दी गई 'व्याख्या' (Explanation) को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि अक्सर एक व्याख्या से कई नए प्रश्न तैयार हो जाते हैं।
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